कोर्ट ने लखनऊ के एफएसएल से अभिलेख और अन्य संबंधित दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों की जांच कराई। एफएसएल रिपोर्ट में हस्ताक्षरों में विसंगतियां मिलने के बाद याची के अधिवक्ता ने व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर कहा कि वह पॉलीयूरिया-पॉलीडिप्सिया बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके कारण पहले जैसे हस्ताक्षर नहीं कर पा रहे हैं।
कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया और कहा कि प्रथमदृष्टया अपराध बनता है। चूंकि कथित अपराध न्यायालय के समक्ष हुआ है। इसलिए बीएनएसएस के तहत न्यायालय स्वयं शिकायत दर्ज कराएगा। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी से शिकायत पर हस्ताक्षर कराने का निर्देश देते हुए याची और उनके अधिवक्ता के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि चूंकि प्रथमदृष्टया पूरी याचिका की स्थापना ही कूटरचना, दस्तावेजों के निर्माण और अन्य कथित कदाचार का परिणाम प्रतीत होती है। इसलिए इस जनहित याचिका पर आगे की सुनवाई मजिस्ट्रेट के निर्णय तक स्थगित रहेगी।