न्यूनतम वेतन भुगतान मांगने पर सेवा से बर्खास्त किए गए होमगार्डों को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने उनको तत्काल बहाल कर वेतन भुगतान करने का आदेश दिया है। बर्खास्त किए गए होमगार्ड बस्ती मंडल के हैं, जिन्होंने बर्खास्तगी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने डिविजनल कमांडेंट होमगार्ड बस्ती मंडल द्वारा बिना विभागीय जांच के छह होमगार्डों को बर्खास्त करने के आदेश पर भी रोक लगा दी है।
कोर्ट ने कहा कि आदेश प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है और पूछा है कि क्यों न अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया जाए। याचिका की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने धर्मात्मा प्रसाद शुक्ल व पांच अन्य होमगार्डों की याचिका पर दिया है।
याचिका के अनुसार होमगार्डों ने कांस्टेबल के समान न्यूनतम वेतन के बराबर ड्यूटी भत्ते की मांग में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन से खीझे अधिकारियों ने याचियों को बर्खास्त कर दिया। उन्होंने होमगार्ड प्रभारी मंत्री से गुहार लगाई। मंत्री ने याचियों को बहाल करने का आदेश दिया किंतु इसका पालन नहीं किया गया तो हाईकोर्ट की शरण ली।
कोर्ट ने डिविजनल कमांडेंट होमगार्ड बस्ती मंडल को 20 फरवरी को इस मामले में एक माह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। मगर याचीगण का प्रत्यावेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि उन्होंने अनुशासनहीनता की और विभाग की छवि खराब की है। इस आदेश को फिर से कोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने बर्खास्तगी एवं प्रत्यावेदन निरस्त करने के आदेशों को निलंबित कर दिया है और तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है।