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यूपी : हाईकोर्ट की टिप्पणी- आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही युवा पीढ़ी

Sun, 25 Oct 2026 07:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। कहा कि आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण युवा पीढ़ी पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। कहा कि आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण युवा पीढ़ी पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही है। लिहाजा, स्कूलों में प्रवेश के समय सही जन्मतिथि दर्ज करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जल्द से जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी करे। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने नाबालिग के अपहरण के आरोपी युवक की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को प्रस्तावित गाइडलाइन की जानकारी दी।

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प्रवेश के समय चार दस्तावेजों में से एक होगा जरूरी

अपर मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि 17 सितंबर और 21 अक्तूबर को हुई बैठकों में स्कूलों में बच्चों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए गाइडलाइन का प्रारूप तैयार किया गया। इसके तहत जन्म व मृत्यु पंजीकरण से संबंधित प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने पर उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली, 2011 के नियम-9 के अनुसार निर्धारित चार दस्तावेजों में से किसी एक को आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव है।

इनमें अस्पताल या सहायक नर्स एवं मिडवाइफ के अभिलेख, आंगनवाड़ी का रिकॉर्ड, जन्म एवं मृत्यु संबंधी ग्राम पंजीयन व माता-पिता या अभिभावक की ओर से शपथपत्र के माध्यम से उम्र की घोषणा शामिल है। स्कूल में प्रवेश के समय छात्र की जन्मतिथि के साथ यह भी दर्ज किया जाएगा कि चार निर्धारित विकल्पों में से कौन-सा दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है। संबंधित कॉलम के सामने कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर होंगे। यह व्यवस्था कक्षा एक के साथ अन्य कक्षाओं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर भी लागू करने का प्रस्ताव है।

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प्रधानाध्यापक को देना होगा निर्धारित प्रारूप में प्रमाणपत्र

प्रस्तावित गाइडलाइन में यह व्यवस्था है कि प्राधिकारी की मांग पर प्रधानाध्यापक या प्रधानाध्यापिका विद्यालय के अभिलेखों के आधार पर छात्र की जन्मतिथि और किसी निर्धारित तारीख को उसकी आयु का प्रमाणपत्र देंगे। इसमें छात्र का नाम, माता-पिता का नाम, दर्ज जन्मतिथि तथा वर्ष, माह और दिन में आयु का विवरण शामिल होगा।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि गाइडलाइन को अंतिम रूप देने से पहले विधि विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों से परामर्श किया जा रहा है। जल्द ही इसे जारी किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

जमानत अर्जी में उम्र को लेकर उठा विवाद

मामला मैनपुरी जिले के डन्नाहर थाना क्षेत्र का है। याची युवक पर शिकायतकर्ता की बेटी को बहलाकर ले जाने का आरोप था। एफआईआर में लड़की की उम्र 16 वर्ष बताई गई जबकि कक्षा पांच के प्रमाणपत्र के आधार पर उसे 14 वर्ष से कम दर्शाए जाने का मामला सामने आया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष पीड़िता के बयानों और शैक्षिक अभिलेखों से संबंधित तथ्य रखे। पीड़िता ने बयान में उम्र 14 वर्ष बताई थी। पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरामई, मैनपुरी से कक्षा आठ उत्तीर्ण किया था। वह युवक के साथ वह अपनी मर्जी से गई थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध थे।

याची की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता के पिता ने उसकी उम्र 16 वर्ष बताई वहीं पुलिस को कक्षा आठ की मार्कशीट के बजाय कक्षा पांच का प्रमाणपत्र दिया गया। पीड़िता के माता-पिता ने मेडिकल परीक्षण कराने से भी इन्कार किया था।
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