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हाईकोर्ट : सेवानिवृत्त होने के बाद बरी होने से परिलाभ का हकदार नहीं, कोर्ट ने खारिज की याचिका

Sun, 14 Apr 2024 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रस्तुत मामले में याची की नियुक्ति सिंचाई विभाग, बरेली के अधिशासी अभियंता ने 17 अगस्त 77 को ट्यूबवेल ऑपरेटर के पद पर की थी। फतेहगंज वेस्ट में तैनाती के दौरान पूरनलाल यदुवंशी से उनकी फसल सिंचाई में न दर्ज करने के लिए 15 दिसंबर 78 को तीस रुपये की रिश्वत लिए जाने के आरोप में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीस रुपये की रिश्वत, एक वर्ष की कैद और सौ रुपये जुर्माना की सजा पाने के बाद. सेवा से 40 वर्ष बर्खास्त रहे ट्यूबवेल ऑपरेटर के सेवानिवृत्ति परिलाभ के दावे को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने बरेली के सिंचाई विभाग में तैनात रहे ट्यूबवेल ऑपरेटर नेतराम की याचिका पर उक्त फैसला सुनाया।

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कोर्ट ने कहा कहा, सेवाकाल के दौरान अपराध से बरी होने पर ही कर्मचारी सेवानिवृत्ति परिलाभ पाने का हकदार हो सकता है। मौजूदा मामले में याची सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर चुका है। ऐसे में अब उसे सेवा में बहाल नहीं किया जा सकता। इसके अलावा उसकी सेवा अस्थाई प्रकृति की थी, इसलिए वह कोई भी राहत पाने का हकदार नहीं हैं। लिहाजा उसकी याचिका बेदम है और खारिज की जाती है।

बरी होने पर सेवानिवृत्ति परिलाभ के लिए पहुंचे थे हाईकोर्ट

प्रस्तुत मामले में याची की नियुक्ति सिंचाई विभाग, बरेली के अधिशासी अभियंता ने 17 अगस्त 77 को ट्यूबवेल ऑपरेटर के पद पर की थी। फतेहगंज वेस्ट में तैनाती के दौरान पूरनलाल यदुवंशी से उनकी फसल सिंचाई में न दर्ज करने के लिए 15 दिसंबर 78 को तीस रुपये की रिश्वत लिए जाने के आरोप में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।

अदालत ने ट्रायल में उसे एक वर्ष की कैद और सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बरेली की जिला अदालत के फैसले के बाद उसे 28 दिसंबर 83 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, सजा के खिलाफ दाखिल अपील एक फरवरी 2023 को मंजूर हो गई और वह बरी हो गया, लेकिन इस बीच उसने वर्ष 2016 में सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर ली। 40 वर्ष सेवा से बर्खास्त रहे नेतराम ने सेवानिवृत्ति परिलाभों के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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याची के वकील की दलील

याची के वकील का कहना था कि याची पर लगाए गए आरोप गलत साबित हुए। झूठे आपराधिक मुकदमे के निस्तारण में देरी न हुई होती तो याची सेवाकाल में ही बहाल हो जाता और उसे सेवा संबंधी सभी लाभ मिलते। याची को बिना विभागीय जांच के बर्खास्त किया गया था। मुकदमे के निस्तारण में हुई देरी के लिए उसे उसके सेवानिवृत्ति परिलाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

सरकारी अधिवक्ता का प्रतिवाद

सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता गिरिजेश त्रिपाठी ने प्रतिवाद करते हुए कहा, याची बाइज्जत बरी नहीं किया गया है। भले ही उसकी बर्खास्तगी विभागीय जांच के बिना हुई थी, लेकिन उसकी सेवा अस्थाई प्रकृति की थी। उसकी सेवा एक माह के नोटिस के साथ कभी भी समाप्त की जा सकती है। इसलिए वह अनुच्छेद 311 (2) के अंतर्गत सरकारी सेवक की परिभाषा में नहीं आता । ऐसे में न तो उसके खिलाफ विभागीय जांच की जरूरत है और न वह किसी भी प्रकार का सेवालाभ पाने का अधिकारी है।
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