मामला शाहजहांपुर-हरदोई-लखनऊ राजमार्ग के विस्तार और चौड़ीकरण से जुड़ा हुआ है। याची की मांग थी कि प्राधिकरण की ओर से चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण परियोजना के लिए जो भूमि अधिग्रहीत की जा रहीं हैं, उस पर रोक लगाई जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी राजमार्ग के निर्माण को एक व्यक्ति के कहने पर रोका नहीं जा सकता है। वह भले ही यह तर्क दे कि उसकी भूमि राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए जरूरी नहीं है। राजमार्ग निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि कौन सी होगी, यह राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तय कर सकता है। वह इसके लिए सक्षम है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा की खंडपीठ ने श्याम सिंह व अन्य की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए की।
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मामला शाहजहांपुर-हरदोई-लखनऊ राजमार्ग के विस्तार और चौड़ीकरण से जुड़ा हुआ है। याची की मांग थी कि प्राधिकरण की ओर से चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण परियोजना के लिए जो भूमि अधिग्रहीत की जा रहीं हैं, उस पर रोक लगाई जाए। अधिग्रहण से उनके मकान, दुकान और भूमि राजमार्ग के दायरे में आ जाएगी।
याची की ओर से तर्क दिया गया कि उनकी भूमि व अन्य चीजें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के महत्व की नहीं हैं। जबकि, प्राधिकरण की ओर से कहा गया कि 2020 में अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर अवार्ड घोषित कर दिया गया। उस समय चुनौती नहीं दी गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह कहते हुए कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राजमार्गों के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि तय करने में सक्षम है। किसी एक व्यक्ति के कहने से अधिग्रहण पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।