झाड़-फूंक और जादू-टोना के नाम पर महिलाओं के उत्पीड़न पर गहरी चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने ऐसी कुरीतियों को रोकने हेतु अभियान चलाने का निर्देश दिया है। विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी की याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि ऐसी घटनाओं अशिक्षा और अज्ञानता की वजह से होती हैं। इसकी रोक थाम के लिए जनता को जागरूक करना होगा। कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह चित्रकूट, बांदा, महोबा तथा बुंदेलखंड आदि आदिवासी बहुल इलाकों में कैंप लगाकर लोगों को जागरूक करे। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
जनहित याचिका में इलाहाबाद के संगम पर हुई घटनाओं का हवाला दिया गया है। संगम पर ओझाई करने वाले महिलाओं का इलाज के नाम पर उत्पीड़न करते हैं। सरकार की ओर से बताया गया कि उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। संगम पर निगरानी की जा रही है ताकि ऐसी घटनाएं न हों। सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। आदिवासी बहुल इलाकों के थानों को आईजी ने लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है।