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क्रेट में नहीं होगा आरक्षण पर विवाद

Mon, 04 May 2015 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) में अब आरक्षण को लेकर विवाद नहीं होगा। सभी विभागों को सीटवार आरक्षण का ब्योरा भेजा गया है। प्रवेश प्रकोष्ठ के अफसरों का दावा सही हुआ तो इसकी वजह से दाखिले की प्रक्रिया भी महीनों नहीं लटकी रहेगी। इतना ही नहीं नि:शक्तता कोटे को लेकर शुरू विवाद के भी खत्म होने का दावा किया जा रहा है। अब 20 सीट में एक नि:शक्त अभ्यर्थी को दाखिला देना होगा।
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विवाद की वजह से इविवि के कई विभागों में पिछले सत्र के डीफिल कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है। इसकी मुख्य वजह मेरिट निर्धारण में मनमानी तथा आरक्षण को लेकर विवाद है। इविवि में आरक्षण की नियमावली है, लेकिन क्रेट में विभाग वार सीट की संख्या काफी कम होती है। ऐसे में आरक्षण लागू करने में अक्सर विवाद होता है। इस आड़ में धांधली का भी आरोप लगता रहा है। इन विवादों को देखते हुए प्रवेश प्रकोष्ठ की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। आवेदन की प्रक्रिया दो जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए विभागों से पदों का विवरण मांगा गया है। साथ में उन्हें आरक्षण का स्टेटस भी भेजा गया है। इसमें बताया गया है कि अलग-अलग सीट की स्थिति में किस कोटे में कितने प्रवेश होंगे।

पिछले साल नि:शक्तता कोटे को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। इविवि में नि:शक्तता कोटे के तहत तीन फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। ऐसे में 33 सीट पर एक नि:शक्त अभ्यर्थी को प्रवेश मिल पाएगा, लेकिन क्रेट में इतनी सीटें एक दो विभाग में ही होती हैं। ऐसे में नि:शक्त अभ्यर्थियों को लाभ नहीं मिल पाता। इसे लेकर अभ्यर्थियों ने पिछले साल काफी विवाद किया था। उनके अनुसार पांच सीट की स्थिति में एक सीट पर नि:शक्त अभ्यर्थी का प्रवेश होना चाहिए। विधिक सलाह के बाद इविवि प्रशासन ने भी यही निर्देश जारी किया था, लेकिन अब उसमें भी संशोधन किया गया है। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. जगदंबा सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि 20 सीट होने पर एक पर नि:शक्त अभ्यर्थी को प्रवेश दिया जा सकता है, लेकिन आरक्षण तीन फीसदी ही रहेगा। उन्होंने बताया कि यही व्यवस्था विश्वविद्यालय में लागू की जाएगी। उनका कहना है कि आरक्षण समेत पूर्व में हुए अन्य विवादों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
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