इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। कहा कि गिरफ्तारी का आधार आरोपी को न बताना और बरामदगी से संबंधित पंचनामा तैयार न करना प्रक्रियात्मक खामी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। कहा कि गिरफ्तारी का आधार आरोपी को न बताना और बरामदगी से संबंधित पंचनामा तैयार न करना प्रक्रियात्मक खामी है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने यह टिप्पणी हत्या के आरोपी संदीप बसोया की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
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गाजियाबाद निवासी याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी को लिखित रूप से गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए। साथ ही उसके कथित खुलासे पर अवैध तमंचे की बरामदगी से पहले पुलिस स्टेशन में कोई पंचनामा भी तैयार नहीं किया गया। राज्य सरकार की ओर से पेश एजीए ने भी इस तथ्य का खंडन नहीं किया।
अदालत ने कहा कि बरामदगी के लिए रवाना होने से पहले पुलिस स्टेशन में आरोपी के हस्ताक्षरयुक्त पंचनामा तैयार करना अनिवार्य है। कोर्ट ने विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य मामले का हवाला दिया। स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के समय व रिमांड आदेश से कम से कम दो घंटे पूर्व आरोपी को लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराना आवश्यक है। कोर्ट ने गाजियाबाद सीजेएम की ओर से प्रिंटेड प्रोफार्मा के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई और भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।