सतर्कता विभाग की ओर से कराई गई जांच
मामले में याची दुर्गा दत्त त्रिपाठी ने अपने खिलाफ हुई सतर्कता विभाग की ओर से किए गए जांच को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और आरोप पत्र केसाथ पूरी आपराधिक मुकदमें को रद्द करने की मांग की थी। याची पर आरोप है कि उसने अपने कार्यकाल केदौरान निदेशालय आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाओं के लिए 1991 से 1993 के बीच 17.27 करोड़ रुपये का गबन किया।
मामले में सतर्कता विभाग की ओर से जांच कराई गई थी। जांच में पाया गया कि आवंटित बजट से अधिक का खर्चा दिया गया। मामले में लखनऊ के हुसैनगंज थाने में भ्रष्टाचार के आरोप एफआईआर दर्ज कराई गई और ट्रायल कोर्ट मामले में (उत्तर प्रदेश राज्य बनाम संजीव सक्सेना व अन्य) सुनवाई शुरू हो गई है तो सतर्कता विभाग ने 15 सितंबर को आरोप पत्र दाखिल किया गया।
ट्रायल कोर्ट याची को समन जारी किया है। याची के अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जांच केदौरान बजट के गबन का मामला सामने आया है। 1997 में एफआईआर दर्ज की गई और 1998 में अभियोग शुरू हुआ। इस मामले में 20 साल से अधिक समय हो चुका है।
याची के अधिवक्ता ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के केस का हवाला भी दिया। जवाब में सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि जांच में याची के खिलाफ स्पष्ट आरोप मिले हैं। वह गबन में शामिल रहा है। कोर्ट ने कहा कि देरी के आधार पर एफआईआर को रद्द करना सही नहीं होगा और उसने याची की याचिका को खारिज कर दिया।