इस मामले में दाखिल याचिका अरुणा बनाम स्टेट ऑफ यूपी में कहा गया कि याची के पिता स्वीपर कम चौकीदार के पद पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परीक्षितगढ़ में तैनात थे। उनकी आकस्मिक मृत्यु चार जुलाई 2018 को हो गई थी। जिसके बाद उनकी पुत्री ने पूरे परिवार की तरफ से अनापत्ति प्रस्तुत करते हुए मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी मेरठ के समक्ष आदेवन किया था।
न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान के समक्ष इस मामले में याची अरुणा की ओर से अधिवक्ता विवेक कुमार श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। उनका कहना था कि मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से पारित आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15 का उल्लंघन है। सिर्फ इस आधार पर कि आवेदक शादीशुदा है, उसे उसके पिता के स्थान पर नौकरी देने से मना नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने सीमओ के आदेश को समाप्त करते हुए अरुणा को उसके पिता श्यामलाल की जगह निर्धारित कानून के अनुसार नौकरी प्रदान करने का आदेश पारित किया।