कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची ने प्लॉट नंबर 27 (नवीन परती) पर निर्माण किया है तो उसे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, बशर्ते कारण बताने के लिए उचित अवसर दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्लॉट संख्या 27 (सरकारी भूमि) पर किए गए किसी भी अतिक्रमण को कानून के अनुसार हटाया जा सकता है।
वहीं, निजी भूमि (प्लॉट संख्या 28) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का पालन करना होगा। सुनवाई के दौरान प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने कोर्ट को बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल प्लॉट संख्या 28 पर स्थित अशोक कुमार सिंह के उस निर्माण के खिलाफ की गई थी, जो स्वीकृत विकास योजना के अनुरूप नहीं था।
कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए यह भी जोड़ा कि यदि पक्षकारों के बीच कोई निजी विवाद है तो वे सक्षम सिविल कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी निजी निर्माण पर कार्रवाई करने से पहले नोटिस जारी किया जाए।