175-3 काफी हद तक 156-3 के समान, पुराने नियम ही होंगे लागू
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि बीएनएसएस की धारा-175(3) के प्रावधान काफी हद तक पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-156(3) के समान हैं। इसलिए पूर्व में स्थापित कानूनी सिद्धांत नए पर भी लागू होंगे। आवेदन में ऐसे किसी साक्ष्य की आवश्यकता नहीं दिखती, जिसे केवल पुलिस जांच के जरिये ही जुटाया जा सकता हो तो मजिस्ट्रेट उसे शिकायत के रूप में मान सकता है। पुलिस जांच का आदेश तब दिया जाना चाहिए, जब अभियुक्तों का विवरण ज्ञात न हो, बरामदगी की आवश्यकता हो या साक्ष्य एकत्र करने के लिए वैज्ञानिक जांच की जरूरत हो।
हाईकोर्ट ने पाया कि मामले में याची को घटना के तथ्यों की पूरी जानकारी है। वह अपने साक्ष्य स्वयं न्यायालय में प्रस्तुत कर सकता है। साथ ही घटना के काफी समय बीतने के कारण अब मौके से भौतिक साक्ष्य (जैसे खून से सनी मिट्टी) मिलना संभव नहीं है। ऐसे में कोर्ट ने इन आधारों पर मजिस्ट्रेट के आवेदन को शिकायत के रूप में दर्ज करने के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।