इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने के नियमों और किशोरों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि किशोर अवस्था में दर्ज किसी मामले या दोषसिद्धि को पासपोर्ट जारी करने में कानूनी अड़चन नहीं बनाया जा सकता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने के नियमों और किशोरों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि किशोर अवस्था में दर्ज किसी मामले या दोषसिद्धि को पासपोर्ट जारी करने में कानूनी अड़चन नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत ऐसे रिकॉर्ड को मिटाना अनिवार्य है, ताकि युवाओं को नई शुरुआत का अधिकार मिल सके।
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यह मामला गोरखपुर निवासी मोहम्मद यूनुस अंसारी की याचिका से जुड़ा था, जिनका पासपोर्ट आवेदन क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ ने एक पुराने आपराधिक मामले के आधार पर खारिज कर दिया था। याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को वर्ष 2010 में, 16 वर्ष की आयु में, एक मामले में किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया गया था, लेकिन बोर्ड ने उसे सुधार हेतु परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर रखा था, जिसे उसने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद केंद्र सरकार और पासपोर्ट विभाग के रुख पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने अपने विवेक का प्रयोग नहीं किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। कोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को याची के आवेदन पर नए सिरे से विचार कर तत्काल पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है।