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High Curt : श्री बांके बिहारी जी मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाना सही, अवमानना याचिका खारिज

Wed, 04 Feb 2026 03:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज के मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने के फैसले को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई-पावर्ड मंदिर प्रबंधन समिति के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी है।
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ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर वृंदावन मथुरा। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज के मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने के फैसले को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई-पावर्ड मंदिर प्रबंधन समिति के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी है।

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कोर्ट ने कहा कि दर्शन अवधि बढ़ाने का फैसला तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ और उन्हें हो रही असुविधा को देखते हुए लिया गया, जिससे मंदिर के भीतर और बाहर दबाव कम किया जा सके। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने गौरव गोस्वामी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति ने नवंबर 2022 में हाईकोर्ट द्वारा पारित स्थगन आदेश का उल्लंघन करते हुए दर्शन का समय बढ़ाया है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि नवंबर 2022 में हाईकोर्ट ने मथुरा के सिविल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई थी, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट और जिला जज के बीच हुई बातचीत के आधार पर दर्शन का समय बढ़ाने की कोशिश की गई थी।

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हालांकि, बाद में तीर्थ यात्रियों को हो रही भारी परेशानी और प्रशासनिक गतिरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आठ अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया था। समिति की 11 सितंबर 2025 को हुई बैठक में दर्शन अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे 19 सितंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर, मथुरा की ओर से कार्यालय ज्ञापन जारी कर लागू किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि नवंबर 2022 का स्थगन आदेश जिस संदर्भ में दिया गया था, वह उस स्थिति से भिन्न था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति ने विचार-विमर्श कर निर्णय लिया। समिति ने सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त अधिकारों के तहत उचित प्रक्रिया अपनाते हुए फैसला लिया है और इसमें किसी भी प्रकार से हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं हुई है। कोर्ट ने कहा कि इसमें अवमानना का कोई मामला नहीं बनता और याचिका खारिज कर दी।
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