इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किरायेदारी विवाद से जुड़े एक मामले में कहा कि किसी किरायेदार की मृत्यु के बाद बेदखली के मुकदमे में उसके सभी कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाना जरूरी नहीं है। मूल किरायेदार के निधन के बाद उसके उत्तराधिकारी संयुक्त किरायेदार माने जाते हैं। इसलिए किसी एक के खिलाफ चलाया गया मुकदमा भी सभी पर प्रभावी होगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने वाराणसी निवासी आशीष कुमार अग्रवाल की याचिका खारिज करते हुए की।
मामला चित्रकूट की जिला अदालत में दाखिल बेदखली वाद से जुड़ा है। जिसमें किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके एक वारिस को पक्षकार बनाकर कार्यवाही आगे बढ़ाई गई थी। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने निचली अदालत और पुनरीक्षण न्यायालय के आदेशों को सही ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट को मामले के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए और कहा कि सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए।