आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी। वह केवल अपनी इच्छापूर्ति के लिए संबंध बनाया। उसका पीड़िता से शादी करने का कोई इरादा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के दीपक गुलाटी बनाम हरियाणा राज्य मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि शादी का वादा शुरू से ही झूठा हो और उसका उद्देश्य संबंध बनाने के लिए केवल महिला की सहमति पाना है, तो ऐसी सहमति शून्य मानी जाती है। कोर्ट ने इसे समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना और कहा कि ऐसे मामलों में कोई उदारता नहीं दिखाई जा सकती। इसी के साथ कोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी रद्द कर दी।