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High Court : अदालत डाकिया या दर्शक नहीं, मुकदमा वापसी पर दूसरे पक्ष के अधिकारों को भी देखना होता है

Mon, 09 Feb 2026 02:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत कोई डाकिया या दर्शक नहीं, जो वादी की इच्छा पर निर्भर रहे। उसे न्याय हित में देखना होता है कि इससे किसी अन्य पक्ष के अधिकारों का हनन तो नहीं हो रहा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत कोई डाकिया या दर्शक नहीं, जो वादी की इच्छा पर निर्भर रहे। उसे न्याय हित में देखना होता है कि इससे किसी अन्य पक्ष के अधिकारों का हनन तो नहीं हो रहा है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह, न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पूर्ण पीठ ने वाराणसी की जीरा देवी व अन्य की याचिका सुनवाई के लिए एकल पीठ के पास भेज दी।

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एक संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर मुन्नन देवी व अमरावती के बीच विवाद चल रहा था। मुन्नन देवी का आरोप था कि अमरावती ने धोखाधड़ी कर उनकी जमीन अपने नाम करा ली। इसे लेकर मुन्नन देवी ने ट्रायल कोर्ट में वाद दायर किया था, जो लंबित था। इसी बीच मुन्नन देवी ने जीरा देवी और घनश्याम पटेल को विवादित संपत्ति बेच दी। मुकदमा लंबित रहने के दौरान ही फरवरी 2013 में मुन्नन देवी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी बेटी फूलपत्ती वादी बनीं। उन्होंने पांच अप्रैल 2018 को बिना शर्त मुकदमा वापस लेने के लिए आवेदन किया, जिसे एडीजे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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इस फैसले का विरोध करते हुए याची जीरा देवी व अन्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी कि इस फैसले से उनका हित प्रभावित हो रहा है। मुकदमा वापस लेने का अधिकार वादी को है या नहीं, इसके निर्धारण के लिए जेजे मुनीर की एकल पीठ ने मामले को पूर्ण पीठ को भेज दिया।
अनुराग मित्तल, रायसा सुल्ताना बेगम और अनुराग मित्तल मामले की दी गईं दलीलें...

पूर्ण पीठ में सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ब्रिज राज ने दलील दी कि बिना प्रभावित पक्ष को सुने मुकदमे को वापस लेने के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुराग मित्तल के मामले में दिया गया फैसला दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) पर लागू नहीं होगा। वहीं, प्रतिवादी के अधिवक्ता ने रायसा सुल्ताना बेगम मामले का हवाला देते हुए दलील दी कि मुकदमा वापसी का आवदेन देते ही वह स्वत: समाप्त हो जाता है।

इस पर पूर्ण पीठ ने कहा कि रायसा सुल्ताना बेगम मामले में दिए गए फैसले में कहा गया था कि मुकदमा वापसी के लिए आवेदन देते ही मुकदमा स्वतः समाप्त हो जाता है, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय के ‘राजेंद्र प्रसाद गुप्ता’ मामले के आलोक में गलत ठहराया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का ‘अनुराग मित्तल’ (2018) फैसला हिंदू विवाह अधिनियम पर आधारित था। वह सीपीसी पर लागू नहीं होता। इसी के साथ पूर्ण पीठ ने मामले के अंतिम निपटारे के लिए उसे नियमित पीठ के पास वापस भेज दिया।
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