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High Court : किशोर पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने के लिए आईक्यू और ईक्यू टेस्ट अनिवार्य

Mon, 13 Oct 2025 12:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जघन्य अपराधों में किशोर पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने के लिए आईक्यू और ईक्यू टेस्ट कराया जाना अनिवार्य है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जघन्य अपराधों में किशोर पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने के लिए आईक्यू और ईक्यू टेस्ट कराया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) किसी बच्चे पर बालिग (वयस्क) की तरह मुकदमा चलाने के लिए आंतरिक भावना पर निर्भर नहीं रह सकता। उसका मानसिक-भावनात्मक परिपक्वता का वैज्ञानिक और कठोर मूल्यांकन आवश्यक है।

कोर्ट ने इसके लिए जेजे बोर्ड और बाल न्यायालयों के लिए 11 अनिवार्य दिशानिर्देशों का एक सेट तैयार किया है जिनका पालन तब तक किया जाएगा जब तक कि विधायिका इस संबंध में स्वयं कोई कानून नहीं बना लेती। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने प्रयागराज निवासी किशोर की याचिका पर दिया है।

जॉर्जटाउन थाने में 2019 में किशोर पर हत्या सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। अपराध के समय किशोर की उम्र 17 साल छह महीने 27 दिन थी। जेजे बोर्ड ने उस पर पहले से दर्ज दो मुकदमों, जिला परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट, प्रारंभिक मूल्यांकन के आधार पर हत्या और अन्य अपराधों के परिणामों को समझने में सक्षम पाते हुए एक वयस्क की तरह मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।

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अपीलीय न्यायालय ने भी जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा। इन दोनों आदेशों को किशोर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि किशोर न्याय बोर्ड, अपीलीय न्यायालय की ओर से उम्र निर्धारण के लिए किया गया प्रारंभिक मूल्यांकन कानून के अनुसार नहीं है और अविश्वसनीय है।

कोर्ट की ओर से जारी 11 अनिवार्य दिशानिर्देश

  • बच्चों की उम्र का निर्धारण करने के लिए बौद्धिक क्षमता (आईक्यू) और भावनात्मक बुद्धिमत्ता (ईक्यू) का मनोवैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। मनोवैज्ञानिक परीक्षण के लिए मानकीकृत उपकरणों जैसे बिनेट कामत टेस्ट, विनलैंड सोशल मैच्योरिटी स्केल (वीएसएमएस), भाटिया बैटरी टेस्ट आदि का उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही रिपोर्ट में उपयोग की गई कार्यप्रणाली का उल्लेख होना चाहिए।
  • जघन्य अपराध करने की बच्चे की शारीरिक और मानसिक क्षमता और उसके परिणामों को समझने की उसकी क्षमता के संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज किए जाएंगे।
  • बोर्ड परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी को 15 दिन के भीतर एक सामाजिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देगा।
  • बाल कल्याण पुलिस अधिकारी दो सप्ताह के भीतर बच्चे की और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर एक सामाजिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
  • जघन्य अपराध के मामलों में, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी एक महीने के भीतर गवाहों के बयान और जांच के अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करेगा।
  • बच्चे के किसी भी पिछले अपराध में संलिप्तता की संख्या और प्रकृति का विवरण देना होगा।
  • परिवीक्षा या सुधार केंद्रों में पूर्व प्रतिबद्धताओं का विवरण माना जाना चाहिए।
  • बोर्ड को यह जांचना होगा कि क्या कथित अपराध समान न्याय निर्णित अपराधों के दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा है।
  • कानूनी हिरासत से बच्चे के भाग जाने का कोई भी इतिहास नोट किया जाना चाहिए।
  • बच्चे की बौद्धिक अक्षमता या मानसिक बीमारी की डिग्री, यदि कोई हो तो उसका आकलन किया जाना चाहिए।
  • बच्चे के स्कूल रिकॉर्ड और शिक्षा के इतिहास पर विचार किया जाना चाहिए।
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किशोर न्याय अधिनियम-2015 का उद्देश्य बच्चे के सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित करना है। इसलिए मानसिक क्षमता और परिणामों को समझने का सटीक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन होना चाहिए। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

विनेट कामत टेस्ट-इस टेस्ट से किसी व्यक्ति की सामान्य बौद्धिक कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जाता है।

विनलैंड सोशल मैच्योरिटी स्केल-इसका भी प्रयोग बुद्धि के आकलन के लिए किया जाता है।

भाटिया बैटरी टेस्ट-इसके माध्यम से भी बुद्धि परीक्षण किया जाता है।

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