कोर्ट की ओर से जारी 11 अनिवार्य दिशानिर्देश
- बच्चों की उम्र का निर्धारण करने के लिए बौद्धिक क्षमता (आईक्यू) और भावनात्मक बुद्धिमत्ता (ईक्यू) का मनोवैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। मनोवैज्ञानिक परीक्षण के लिए मानकीकृत उपकरणों जैसे बिनेट कामत टेस्ट, विनलैंड सोशल मैच्योरिटी स्केल (वीएसएमएस), भाटिया बैटरी टेस्ट आदि का उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही रिपोर्ट में उपयोग की गई कार्यप्रणाली का उल्लेख होना चाहिए।
- जघन्य अपराध करने की बच्चे की शारीरिक और मानसिक क्षमता और उसके परिणामों को समझने की उसकी क्षमता के संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज किए जाएंगे।
- बोर्ड परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी को 15 दिन के भीतर एक सामाजिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देगा।
- बाल कल्याण पुलिस अधिकारी दो सप्ताह के भीतर बच्चे की और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर एक सामाजिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
- जघन्य अपराध के मामलों में, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी एक महीने के भीतर गवाहों के बयान और जांच के अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करेगा।
- बच्चे के किसी भी पिछले अपराध में संलिप्तता की संख्या और प्रकृति का विवरण देना होगा।
- परिवीक्षा या सुधार केंद्रों में पूर्व प्रतिबद्धताओं का विवरण माना जाना चाहिए।
- बोर्ड को यह जांचना होगा कि क्या कथित अपराध समान न्याय निर्णित अपराधों के दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा है।
- कानूनी हिरासत से बच्चे के भाग जाने का कोई भी इतिहास नोट किया जाना चाहिए।
- बच्चे की बौद्धिक अक्षमता या मानसिक बीमारी की डिग्री, यदि कोई हो तो उसका आकलन किया जाना चाहिए।
- बच्चे के स्कूल रिकॉर्ड और शिक्षा के इतिहास पर विचार किया जाना चाहिए।
किशोर न्याय अधिनियम-2015 का उद्देश्य बच्चे के सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित करना है। इसलिए मानसिक क्षमता और परिणामों को समझने का सटीक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन होना चाहिए। - इलाहाबाद हाईकोर्ट
विनेट कामत टेस्ट-इस टेस्ट से किसी व्यक्ति की सामान्य बौद्धिक कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जाता है।
विनलैंड सोशल मैच्योरिटी स्केल-इसका भी प्रयोग बुद्धि के आकलन के लिए किया जाता है।
भाटिया बैटरी टेस्ट-इसके माध्यम से भी बुद्धि परीक्षण किया जाता है।