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Medical Confrence : बुखार व पेट के दाहिने हिस्से में ऊपर की तरफ दर्द लिवर एब्सेस का है लक्षण

Sun, 12 Oct 2025 05:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

लिवर एब्सेस (यकृत फोड़ा) के मुख्य कारण जीवाणु और परजीवी संक्रमण हैं, जो अक्सर पित्त नली, आंतों या आस-पास के अंगों से लिवर में फैलते हैं। अन्य कारणों में फंगल संक्रमण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होती हैं।
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मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉफ्रेंस का आयोजन किया गया है। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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लिवर एब्सेस (यकृत फोड़ा) के मुख्य कारण जीवाणु और परजीवी संक्रमण हैं, जो अक्सर पित्त नली, आंतों या आस-पास के अंगों से लिवर में फैलते हैं। अन्य कारणों में फंगल संक्रमण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होती हैं। इस दौरान लिवर में सूजन आ जाती है। इस मरीज को बुखार, पेट के दाहिने हिस्से में ऊपर की तरफ दर्द और ब्लड में इन्फेक्शन होने की संभावना रहती है। अल्ट्रासाउंड से इसकी जांच होती है। इसका दवा से उपचार संभव है। विशेष परिस्थितियों में सर्जरी की आवश्यकता होती है।

यह जानकारी रविवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रो. प्रीतमदास सभागार में क्लीनिकल फ्रंटलाइंस 2025 के तहत संक्रामक रोग और ट्रॉपिकल मेडिसिन में नवीनतम अपडेट्स पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान लखनऊ के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. आलोक सिंह ने दी। सम्मेलन में लगभग 300 प्रतिभागी उपस्थित रहे। जिनमें प्रदेश भर के फैकल्टी सदस्य और रेजिडेंट डॉक्टर शामिल रहे। सम्मेलन में लखनऊ केजीएमयू, मेरठ के एलएलआरएम, झांसी के एमएलबी, मथुरा के केडी व सुल्तानपुर और चंदौली के स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों से भी चिकित्सक ने भाग लिया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एयर वाइस मार्शल अमन कपूर, वीएसएम (सेंट्रल एयर कमांड, बमरौली) ऑनलाइन व विशिष्ट अतिथि मिलिट्री हॉस्पिटल के कमांडेंट ब्रिगेडियर (डॉ.) यशवीरमाथुर, एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय, डॉ. अजीत चौरसिया व डॉ. मनोज माथुर मौजूद रहे। इस दौरान ट्रिनिटी हेल्थ ऑफ न्यू इंग्लैंड कनेक्टिकट अमेरिका न्यूक्लियर मेडिसिन चिकित्सा निदेशक डॉ. भावना राठौर संक्रमणों के उपचार में न्यूक्लियर मेडिसिन की भूमिका, डेंगू की चुनौतियों पर एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रयागराज की विभागाध्यक्ष पूनम गुप्ता प एमएलएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता चौरसिया ने मातृ वायरल संक्रमण एवं नवजात शिशुओं में संक्रमण की रोकथाम के बारे में बताया।
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चिकनगुनिया ने की है वापसी - डॉ. नितिन बंसल, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, देहरादून

2006 के बाद से चिकनगुनिया के मामले फिर से देखने को मिल रहे हैं। 2024 में देश के कई राज्यों में चिकनगुनिया के मरीज देखने को मिले थे। अब यह एडीज मच्छर की दूसरी प्रजातियों में पनपने लगा है। चिकनगुनिया के दौरान मरीज को बुखार के साथ जोड़ों में दर्द और सूजन की शिकायत होती है। इसके अलावा त्वचा में दाने की भी शिकायत हो सकती है। इसका वायरस मच्छर में लम्बे समय तक जीवित रहता है।

बार-बार सिरदर्द होना पर जरूरी है ब्रेन टीबी की जांच कराना - प्रकाश चंद्र पांडेय, न्यूरोलॉजिस्ट, एसजीपीजीआई, लखनऊ

ब्रेन टीबी काफी देखने को मिलता है। अगर बार-बार सिरदर्द की समस्या हो रही है तो ब्रेन टीबी की जांच कराना जरूरी है। इसके अलावा बुखार, थोड़ी सी उल्टी जैसे इसके लक्षण होते हैं। इसके ठीक होने की संभावनाएं काफी कम होती है।

कीमोथेरेपी के कारण होता है फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया - डॉ. एसपी वर्मा, विभागाध्यक्ष, हीमैटोलॉजी विभाग, केजीएमयू, लखनऊ

फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया एक गंभीर स्थिति है। जिसमें कम श्वेत रक्त कोशिकाएं (खासकर न्यूट्रोफिल) और बुखार एक साथ होते हैं। यह अक्सर कीमोथेरेपी या अन्य कैंसर के उपचार के कारण होता है, क्योंकि यह उपचार प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देते हैं। यह एक ऑन्कोलॉजिकल आपातकाल है, क्योंकि कम श्वेत रक्त कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता को बहुत कम कर देती हैं, जिससे व्यक्ति को गंभीर संक्रमण का खतरा हो जाता है।

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