विभाग द्वारा जारी उस सूची में पहले स्थान पर रहे याची को उसी पद पर वर्कचार्ज पर प्रोन्नत कर दिया गया। संतोषजनक सेवाओं के साथ निरंतर कार्यरत याची की सेवा को वर्ष 2011 में नियमित किया गया। वर्ष 2022 में रिटायर हाेने पर याची को पुरानी पेंशन के स्थान पर नई पेंशन का लाभ प्रदान किया गया। याची ने पुरानी पेंशन योजना का दावा किया तो अधिशासी अभियंता ने यह कहते हुए लाभ देने से इन्कार कर दिया कि याची की सेवाएं अप्रैल 2005 के बाद नियमित हुई हैं।
याची ने अधिशासी अभियंता के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पाया कि विभाग को 21 वर्ष की निरंतर सेवा देने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की असंवेदनशीलता और उदासीनता के चलते याची के नियमितिकरण में देरी हुई। कोर्ट ने अधिशासी अभियंता द्वारा पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से इन्कार करने वाले 31 मई 2022 को जारी आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विभागीय उदासीनता के कारण कर्मचारी की सेवाओं के नियमितिकरण में देरी को आधार बना कर उन पर नई पेंशन योजना थोपी नहीं जा सकती, और इस आधार पर कर्मचारी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ न देना अवैधानिक ही नहीं मनमाना भी है।