याचियों के अधिवक्ता ने कहा कि पुत्री का अपहरण कर शादी करने का अपराध बन नहीं रहा है। क्योंकि याचीगण बालिग हैं। प्राथमिकी दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने कविता चंद्रकांत लखानी बनाम महाराष्ट्र राज्य सहित कई अन्य मामलों में प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश दिया है।
मौजूदा मामला भी इसी तरह का है। इस वजह से इसे भी रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मामला दो व्यक्तियों के जीवन और साथी चुनने की स्वतंत्रता का है। प्रत्येक बालिग को उसे अपनी इच्छानुसार किसी के साथ रहने का अधिकार है। क्योंकि, याची रेखा सिंह ने जो कि बालिग है और अपनी मर्जी से शादी कर पति (याची नंबर दो) के साथ रह रही है। लिहाजा, प्राथमिकी का कोई मतलब नहीं है। इस वजह से इसे रद्द किया जाता है।