समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित हत्याकांड मामले में आरोपी करवरिया बंधुओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत (पैरोल) दी है। न्यायमूर्ति केजे ठाकर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने करवरिया बंधुओं को एक महीने की अंतरिम राहत दी है।
पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदय भान करवरिया, पूर्व एमएलसी सूरज भान करवरिया और इनके रिश्तेदार राम चंद्र त्रिपाठी को अंतरिम राहत मिली है। कपिल मुनि, उदय भान और सूरजभान तीनों सगे भाई हैं। तीनों पिछले कई सालों से जेल में बंद हैं।
प्रयागराज के ट्रायल कोर्ट ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील पिछले कई सालों से लंबित है। जवाहर यादव उर्फ पंडित को 13 अगस्त 1996 को गोलियों से भून दिया गया था। इस मामले में जिला अदालत ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, उनके भाई उदयभान व सूरजभान और रिश्तेदार रामचंद्र उर्फ कल्लू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जवाहर पंडित की पत्नी विजमा यादव समाजवादी पार्टी से विधायक हैं।
जवाहर यादव उर्फ पंडित को 13 अगस्त 1996 को गोलियों से भून दिया गया था। इस मामले में जिला अदालत ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, उनके भाई उदयभान व सूरजभान और रिश्तेदार रामचंद्र उर्फ कल्लू को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पहली बार एके 47 से तड़तड़ाई थीं गोलियां
विधायक विजमा के पति जवाहर यादव उर्फ पंडित को बेहद सनसनीखेज तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया था। जिले की यह पहली वारदात थी, जिसमें एके-47 का इस्तेमाल हुआ था और गोलियों की तड़तड़ाहट से सिविल लाइंस थर्रा उठा था। 23 साल बाद इस मामले में चार नवंबर 2019 को करवरिया बंधुओं को सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद से वह नैनी जेल में निरुद्ध हैं।