जीवन रक्षक उपकरण दिए बगैर नालों की सफाई में कर्मचारियों को लगाने के मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने हलफनामा दाखिल कर सरकार को बताया कि 20 जून तक प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में नालों की सफाई कर दी जाएगी। इसके साथ ही 24 जून तक सभी 18 मंडलों में इसकी निगरानी के लिए टीम गठित कर औचक निरीक्षण किया जाएगा।
यह देखा जाएगा कि कहां काम हुआ है और कहां नहीं हुआ है। जहां काम नहीं हुआ होगा, उसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने मामले में जानकारी देने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान ली गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
इसके पूर्व प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे को कोर्ट ने रिकॉड पर लेते हुए मामले में तीन बिंदुओं पर जानकारी देने को कहा है। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने पक्ष रखा। जबकि, नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी पेश हुए। कोर्ट ने कहा है कि सफाई कर्मचारियों के लिए जो सुरक्षात्मक उपाय करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, उसका अनुपालन किया गया या नहीं।
सरकार इसकी जांच कैसे करेगी, इसके लिए क्या उपाय किए गए हैं। इसके बारे में बताना होगा। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कार्य कर रहे सफाई कर्मचारियों के मानदेय के पुनर्निधारण के लिए क्या उपाय किए गए हैं और सरकार ने इन्हें शिक्षित करने के लिए क्या कदम उठा रही है। कोर्ट ने मामले में नगर निगम प्रयागराज से भी अगली सुनवाई पर लोगों की शिकायतों के निस्तारण के लिए पोर्टल के संबंध में जानकारी दाखिल करने के लिए कहा है।