वहीं दूसरी घटना 3 जनवरी 2013 की बताई गई, जिसमें कहा गया कि उस दिन कविता अपनी सास के साथ घर पर अकेली थी। परिवार के अन्य लोग बाहर गए थे। तभी कविता के मायके से उसके पिता और कुछ अन्य रिश्तेदार आए। उसकी मां के साथ झगड़ा और मारपीट की। इसका मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में ट्रायल में सभी आरोपी बरी हो गए।
फैमिली कोर्ट ने इन घटनाओं के आधार पर पत्नी द्वारा क्रूरता किए जाने का आधार पाते हुए तलाक की डिक्री को मंजूरी दे दी।
अपीलार्थी के अधिवक्ता का कहना था कि उसे पर लगाए गए क्रूरता के आरोप कभी साबित नहीं किया जा सके। सभी आरोप झूठे पाए गए। यहां तक की 16 अप्रैल को हुई घटना की प्राथमिक भी नहीं दर्ज कराई गई थी, जबकि प्रतिवादी स्वयं पुलिस अधिकारी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर लगाए गए आरोप साबित नहीं किया जा सके हैं। इस स्थिति में क्रूरता के आधार पर तलाक को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने तलाक की डिक्री रद्द कर दी।