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डीएम की कार्यशैली से हाईकोर्ट असंतुष्ट

Thu, 11 Dec 2014 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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 संगम में पक्षियों और मछलियों की मौत के मामले में हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारियां उपलब्ध नहीं कराने पर कोर्ट ने डीएम इलाहाबाद भवनाथ की तीखे शब्दों में निंदा की है। उनके गैरजिम्मेदाराना रवैये पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि डीएम ने हलफनामा दाखिल करने से यह जानना भी जरूरी नहीं समझा कि उसमें लिखा क्या है। इतने महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह कोर्ट का आदेश समझे बिना ही जवाब देगा। गंगा प्रदूषण याचिका की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक कमेटी गठित की है।
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कमेटी में जल निगम के एमडी, प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीईओ, मंडलायुक्त और डीएम इलाहाबाद शामिल होंगे। कमेटी को प्रदूषण निवारण के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। डीएम कानपुर को भी निर्देश दिया है कि वह कमेटी को सहयोग प्रदान करें। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गंगा का जल लाल होने के कारणों की जांच का निर्देश है। मौजूदा समय में कार्यरत एसटीपी की भी जानकारी बोर्ड से मांगी गई है। कोर्ट ने उन औद्योगिक इकाईयों और ट्रेनरीज के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है जिनका प्रदूषित पानी गंगा में सीधे जा रहा है।


पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने साइबेरियन पक्षियों की मौत को लेकर जांच करने का डीएम को निर्देश दिया था। उनको पानी लाल होने के कारणों और पक्षियों की मौत का कारण भी बताना था। डीएम के हलफनामे में कहा गया कि मछलियों और पक्षियों की मौत दुर्घटनावश हुई हैं। यह जानकारी सिर्फ पशु चिकित्सकों की रिपोर्ट पर दे दी गई जबकि कोर्ट ने विशेषज्ञ सलाह लेने के लिए कहा था। अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने पक्षियों की मौत का मामला न्यायालय के समक्ष उठाया। एमिकस क्यूरी अरुण गुप्ता ने भी प्रदूषण पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। याचिका पर अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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