अभ्यर्थियों का कहना है कि पीसीएस मेंस में इस बार जिस तरह से मानविकी के अभ्यर्थियों को झटका लगा है, वह किसी बदलाव का ही नतीजा है। अभ्यर्थियों ने एक माह पहले भी सोशल मीडिया पर भी इस बदलाव की आशंका जताई थी और उस वक्त सचिव की ओर से मौखिक रूप से बयान दिया गया था कि स्केलिंग को नहीं हटाया गया है।
इससे पूर्व पीसीएस-2019 का नोटिफिकेशन आने से पहले भी सोशल मीडिया में यह बात वायरल हुई थी कि आयोग प्रारंभिक परीक्षा में पदों की संख्या के मुकाबले 18 की जगह 13 गुना अभ्यर्थी को सफल घोषित करेगा और इंटरव्यू में पदों की संख्या के मुकाबले दोगुने अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे। उस वक्त भी आयोग के सचिव ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस खबर को अफवाह बताया था, लेकिन जब पीसीएस-2019 का विज्ञापन जारी किया गया था तो उसमें यह बात सही साबित हुई।
अभ्यर्थियों के मुताबिक पीसीएस-2017 का परिणाम आने के पहले सोशल मीडिया पर यह बात भी उठी थी कि इस बार रिजल्ट में सिर्फ और सिर्फ स्केल्ड स्कोर दिखाया जाएगा, न कि वास्तविक अंक। आयोग ने इसका भी खंडन किया था, लेकिन बाद में यह बात सही साबित हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें अब आयोग की ओर से जारी होने वाले बयान पर भरोसा नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों में आयोग ने तमाम बदलाव किए, जिससे सीधे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे थे। इन बदलावों की सूचना कई महीनों बाद आयोग से बाहर आई। इसका मतलब है कि आयोग इस बारे में अभ्यर्थियों को जानकारी नहीं देना चाहता था। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर आयोग दावा कर रहा है कि पीसीएस-2018 में स्केलिंग को नहीं हटाया गया है तो वह लिखित रूप से इसकी जानकारी दे, वरना अभ्यर्थी कोर्ट जाएंगे।