इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के फैसले को पलटते हुए सीआरपीएफ जवान को सजा से मुक्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सीपीआरपीएफ जवान को 30 हजार रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन उम्र कैद की सजा सुनाई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति समीज जैन की दो जजों की खंडपीठ ने सुनाया है। खंडपीठ याची समीर जैन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
कोर्ट ने कहा कि याची के खिलाफ दिए गए सबूत और बयान से यह सिद्ध नहीं होता है कि घटना के लिए वह जिम्मेदार है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि गवाहों के बयान भी संदिग्ध हैं। मामला बुलंदशहर जिले के गुलावटी थाने का है। राजेंद्र शर्मा ने 16 फरवरी 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि संजय शर्मा ने उसके बेटे अंकित से शराब पीने के लिए पानी मांगा। अंकित ने पानी नहीं दिया तो उसने गोली मार दी। संजय शर्मा बागपत जिले का रहने वाला है और वह सीआरपीएफ में जवान था।
वह सगाई में शामिल होने के लिए ससुराल गया हुआ था। उसी दौरान यह घटना हुई। मामले ने निचली अदालत ने संजय को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा 30 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया था। घटना के बाद से ही संजय शर्मा जेल में था। याची के अधिवक्ता अनिल कुमार जायसवाल ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए याची को सजा से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संजय शर्मा को तुरंत छोड़ दिया जाए।