यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने थाना रोजा, शाहजहांपुर के पुलिस कर्मी मदनपाल सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामले में दो दिसंबर 1999 को पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी के साथ मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल दो बदमाश गिरफ्तार किए गए। इसमें से एक भाग गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया।
याकूब उर्फ गुलाम ख्वाजा की स्पाइनल का आपरेशन करने के लिए लखनऊ केजीएमसी रेफर किया गया। पुलिस ने रिमांड ली और लखनऊ ले जाते समय उसकी मौत हो गई। उसकी पत्नी सैरून ने पुलिस पर अभिरक्षा में हत्या करने का आरोप लगाया और मजिस्ट्रेट को अर्जी दी। जो खारिज हो गई तो सत्र अदालत में पुनरीक्षण दाखिल की। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया और एफ आईआर दर्ज हुई।
पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट पेश की। सीजेएम ने रिपोर्ट अस्वीकार करते हुए कंप्लेंट केस दर्ज किया। शिकायतकर्ता व गवाहों के बयान दर्ज कर अभियुक्त पुलिस कर्मियों को सम्मन जारी किया। जिसे धारा 197 के तहत सरकार की अनुमति बगैर आपराधिक कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कार्यवाही अवैध करार देते हुए रद कर दी है।