इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी के पक्ष में दुष्कर्म पीड़िता की पैरोकारी पर संदेह जताया है। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता को 19 अगस्त को अदालत में तलब किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी के पक्ष में दुष्कर्म पीड़िता की पैरोकारी पर संदेह जताया है। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता को 19 अगस्त को अदालत में तलब किया है। साथ ही कहा है कि मामले की सुनवाई के वक्त पीड़िता भी मौजूद रहे। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने गौतम बुद्ध नगर निवासी विकास चौधरी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है।
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मामले के मुताबिक दुष्कर्म में आरोपी याची की ओर से मुकदमा रद्द करने की मांग को लेकर एक अन्य याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। कोर्ट ने पाया में इसके साथ दाखिल वकालतनामे पर आरोपी के हस्ताक्षर थे लेकिन पैरोकार बनी पीड़िता के हस्ताक्षर नहीं थे। वहीं, याचिका संग दाखिल हलफनामा पीड़िता की ओर से दाखिल किया गया था। कोर्ट को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का संदेह हुआ तो याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता को तलब कर पीड़िता को भी सुनवाई के वक्त अदालत ने मौजूद रहने का आदेश दिया है।