कोर्ट ने हाईस्कूल के प्रमाण पत्र को माना आयु निर्धारण साक्ष्य
प्रतिवादी अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी चार साल से शादी का झांसा देकर यौन शोषण कर रहा था। जब पीड़िता और उसके परिवार ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी वादे से मुकर गया। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। वादी पक्ष ने पीड़िता का हाईस्कूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। इसके अनुसार पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी।
कोर्ट ने कहा कि हाईस्कूल का प्रमाणपत्र उपलब्ध हो तो आयु निर्धारण के लिए उसे ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बनाया गया संबंध दुष्कर्म की परिभाषा के अंतर्गत आता है, चाहे वह सहमति से ही क्यों न बनाया गया हो। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त ने स्वयं पीड़िता के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की है और रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता नाबालिग है। इसलिए अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने मुकदमे को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दी।