एकजुटता ही सबसे बड़ा कवच
संत सम्मेलन में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि इस मंच पर वैष्णव, शैव और डंडी स्वामियों की मौजूदगी यह संदेश देती है कि हम अब बंटने वाले नहीं हैं। उन्होंने जोर दिया कि संस्कार और एकता ही धर्मांतरण जैसी समस्याओं का समाधान हैं। सम्मेलन में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि धर्म शत्रु और राष्ट्र शत्रु से सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने समान नागरिक संहिता और एक देश, एक निशान, एक विधान का पुरजोर समर्थन किया। सम्मेलन का संचालन केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, काशी प्रांत अध्यक्ष केपी सिंह, संगठन मंत्री नितिन, डॉ. राज नारायण, स्वामी दुर्गा दास, स्वामी बालक दास, रमन गिरी, कृष्णाचार्य, कौशाल्यानंद, ध्यान मूर्ति माता, आद्या शंकर आदि मौजूद रहे।
संत सम्मेलन के प्रमुख बिंदु :
धर्मांतरण व लव जिहाद: छल-कपट से धर्मांतरण पर लगे पूर्ण रोक, षड्यंत्रकारियों को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब।
मंदिर मुक्ति: सरकारी अधिग्रहण से मुक्त हों मंदिर, हिंदुओं का धन हिंदुओं के काम आए।
बांग्लादेश हिंसा: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठे हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा, हिंदू समाज अब मौन नहीं रहेगा।
सामाजिक एकता: छुआछूत और कुरीतियों का हो अंत, ''एक देश, एक विधान और एक संविधान'' का संकल्प।