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हाईकोर्ट : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेलफेयर एसो. के खाता संचालन पर लगी रोक हटी

Tue, 11 Jan 2022 12:16 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हाईकोर्ट चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन इलाहाबाद व अन्य की याचिका पर दिया है। याची की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन की पुरानी कार्यकारिणी सक्रिय है।
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न्यायालय - फोटो : file photo
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट कीचतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के खाते केसंचालन के मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व कार्यकारिणी को ही वैध माना है और कहा है कि पूर्व कार्यकारिणी केसचिव देवेंद्र पाल सिंह और कोषाध्यक्ष शिवाजी प्रसाद एसोसिएशन के खाते का संचालन करते रहेंगे।

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यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हाईकोर्ट चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन इलाहाबाद व अन्य की याचिका पर दिया है। याची की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन की पुरानी कार्यकारिणी सक्रिय है।

इसके बावजूद अवैधानिक गुट ने असांविधानिक चुनाव करा दिया और भारतीय स्टेट बैंक शाखा हाईकोर्ट इलाहाबाद को पत्र प्रेषित करते हुए अवगत कराया कि नई कार्यकारिणी चुनकर आ गई है, जिसके सचिव अधिवक्ता एवं कोषाध्यक्ष तरुण दत्ता निर्वाचित हुए हैं। खाते का संचालन नए पदाधिकारियों के हस्ताक्षर से किया जाए। वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव देवेंद्र पाल सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस बात की जानकारी होने पर बैंक को पत्र लिखकर अवगत कराया गया कि एसोसिएशन का कोई नया चुनाव नहीं हुआ है और न ही नई कार्यकारिणी गठित हुई है।
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सचिव देवेंद्र पाल सिंह और कोषाध्यक्ष शिवाजी प्रसाद के द्वारा ही खाते का संचालन का किया जा रहा है। इसके बावजूद स्टेट बैंक ने खाते के संचालन पर अवरोध लगा दिया। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह अवरोध गलत और अवैधानिक है।

स्टेट बैंक को यह अधिकार नहीं है कि वह वैध एसोसिएशन के खाते के संचालन पर रोक लगाए। सुनवाई केदौरान स्टेट बैंक केअधिवक्ता ने जानकारी दी कि बैंक की ओर से लगाया गया अवरोध हटा लिया गया है। अब कार्यकारिणी के सचिव और कोषाध्यक्ष खाते का संचालन कर सकते हैं। बैंक की ओर से यह जानकारी देने पर कोर्ट ने कहा कि अब सुनवाई के लिए कुछ बचा नहीं। अत: याचिका समाप्त की जाती है।

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