इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती में आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर कांस्टेबल का चयन रद्द करने के आदेश को खारिज दिया है। साथ ही प्रतिवादी अधिकारियों को मामले में दो माह में फिर से विचार करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती में आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर कांस्टेबल का चयन रद्द करने के आदेश को खारिज दिया है। साथ ही प्रतिवादी अधिकारियों को मामले में दो माह में फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकल पीठ ने आकाश दीप सिंह की याचिका पर दिया है। बागपत निवासी आकाश दीप सिंह का चयन यूपी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ था। हालांकि, बाद में पता चला कि उनके खिलाफ बागपत पुलिस थाने में एक आपराधिक मामला लंबित था।
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इस आधार पर 16 जुलाई 2025 को उम्मीदवारी रद्द कर दी गई तो याची ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अधिवक्ता कुमार परीक्षित ने दलील दी कि याची को भर्ती के समय दर्ज मुकदमे की जानकारी ही नहीं थी। खास बात यह है कि भर्ती प्रक्रिया के बाद दो अगस्त-2025 को सत्र न्यायालय ने उन्हें इस मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया। साथ ही याची की उम्मीदवारी रद्द करने के 16 जुलाई 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने याची को निर्देश दिया कि वह नया प्रतिनिधित्व पत्र संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करे।