इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मामला सामने आया है कि क्या जो पंजीकृत अधिवक्ता न हो, वह किसी और की तरफ से अदालत में बहस कर सकता है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मामला सामने आया है कि क्या जो पंजीकृत अधिवक्ता न हो, वह किसी और की तरफ से अदालत में बहस कर सकता है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। कोर्ट ने इस पर स्थिति साफ करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के सचिव को भी याचिका में पक्षकार बनाया है।
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अधीनस्थ अदालत में शील निधी जायसवाल ने अर्जी दाखिल कर याची विश्राम सिंह को उनकी तरफ से बहस करने की अनुमति मांगी थी। अधीनस्थ कोर्ट ने मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे एक पंजीकृत अधिवक्ता नहीं हैं। इस फैसले को विश्राम सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी दलील है कि वह पेशे से इंजीनियर हैं। उन्हें कानून की अच्छी समझ है और उसने सुप्रीम कोर्ट के 100 से अधिक फैसले पढ़े हैं। ऐसे में उन्हें किसी और की तरफ से बहस करने की अनुमति दी जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।