इलाहाबाद(ब्यूरो)। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर समीकरण बनने बिगड़ने का खेल तेज हो चला है। 150 वें स्थापना वर्ष में अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेगा यह मतदाता नौ जुलाई को तय करेंगे, मगर उम्मीदवार शह और मात के खेल में अपने तई कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। सबसे ज्यादा रस्साकसी इसी पद को लेकर है। अध्यक्ष पद पर वीसी मिश्र के भी दावेदारी ठोंकने के बाद इसमें और तेजी आई है।
अध्यक्ष पद के दूसरे उम्मीदवार वाईडी शर्मा ने पहले ही चुनाव अधिकारी से शिकायत की है कि वीसी मिश्र अवमानना के मामले में सजायाफ्ता होने के कारण मॉरल टरपीट्यूड के दोषी हैं। इसलिए उनको चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए। इसके जवाब में वीसी मिश्र ने तमाम न्यायिक निर्णयों का हवाला देकर कहा कि उनके अध्यक्ष बनने में अवमानना मामले से कोई बाधा नहीं आएगी। सजायाफ्ता होने के बाद भी वह अध्यक्ष पद पर चुने जा चुके हैं। बार कौंसिल के अध्यक्ष और महाधिवक्ता भी रह चुके हैं। फिलहाल इस मामले पर एल्डर कमेटी को निर्णय लेना है। इसके बाद ही तय हो सकेगा कि अध्यक्ष पद पर मुकाबला किन उम्मीदवारों के बीच होना है।
दूसरी ओर वाईडी शर्मा ने इस मामले में याचिका दाखिल करने की भी तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि सात जजों की फु ल बेंच ने मॉरल टरपीट्यूड के दोषी सदस्यों को चुनाव लड़ने से रोकने की हिमायत की थी। मामला यदि अदालत में जाता है तो अध्यक्ष पद की दौड़ में समीकरण एक बार फिर बदल सकते हैं।