कानून और व्यवस्था बनाए रखना अधिकारियों का प्राथमिक कर्तव्य है, और ऐसी प्रथाओं को जारी रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो सार्वजनिक शांति में व्यवधान डालें। न्यायालय के कड़े रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम ने अदालत को आश्वस्त किया कि भविष्य में उक्त संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित नहीं किया जाएगा।
इस वचन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि याचिकाकर्ता अपने वादे का पालन करेगा। हालांकि, पीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि इस वचन का उल्लंघन होता है और नमाज के बहाने भीड़ जुटाई जाती है, जिससे क्षेत्र की शांति प्रभावित होती है, तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।
इसी क्रम में, न्यायालय ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध 16 जनवरी 2026 को जारी किए गए चालान तत्काल वापस लिए जाएं और इस मामले में पूर्व में जारी किए गए अवमानना नोटिसों को भी रद्द कर दिया गया। साथ ही कोर्ट ने पूर्व में हसीन खान को दी गई सुरक्षा प्रशासन को वापस लेने का निर्देश दिया। इन टिप्पणियों और दिशा-निर्देशों के साथ माननीय उच्च न्यायालय ने रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।