पीसीएस में 10वीं रैंक पाने वाले आयुष पांडेय अपनी मां वंदना पांडेय के साथ।
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पति की असमय मृत्यु के बाद वंदना पांडेय पर परिवार और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी आ गई। प्रतापगढ़ से प्रयागराज स्थानांतरण के बाद उन्होंने नौकरी के साथ-साथ मां और पिता दोनों की भूमिका निभाई। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने दोनों बेटों को न सिर्फ शिक्षित किया, बल्कि उनमें संस्कार और संघर्ष की ताकत भी भरी। बड़े बेटे आयुष पांडेय ने इंटर के बाद गाजियाबाद से बीटेक की पढ़ाई की और फिर दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। छोटे बेटे पीयूष ने भी अपनी मेहनत से रेलवे में इंजीनियर पद हासिल कर परिवार को सहारा दिया।
वंदना पांडेय का सपना था कि उनका बेटा प्रशासनिक सेवा में जाए। बेटे ने पीसीएस में दसवीं रैंक हासिल कर न सिर्फ उनकी उम्मीदों को पूरा किया, बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष को भी सार्थक बना दिया। रिटायरमेंट के दिन मिली यह खबर वंदना पांडेय के लिए जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार बन गई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पति की कमी हमेशा खली, लेकिन बच्चों की सफलता ने हर दर्द को कम कर दिया।