साथ ही व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था कि क्या मंदिर में शादी से पहले याचियों के खिलाफ गौतमबुद्धनगर,थाना फेज- दो में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी थी। वहीं एसएचओ जार्जटाउन को भी शादी प्रमाणपत्र जारी करने वाले की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। इसका पालन न करने पर कोर्ट ने उक्त आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। याचिका की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घर से भाग कर आर्य समाज मंदिर, जार्जटाउन में शादी करने वाले जोड़े की विवेचना में सहयोग की शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार सहित विपक्षी से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इससे पहले सात मार्च, 24 को जारी आदेश का पालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने आर्य समाज संस्थान, जार्जटाउन, प्रयागराज से शादी का प्रमाणपत्र जारी करने वाले व्यक्ति को दस्तावेज सहित तलब किया था।
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साथ ही व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था कि क्या मंदिर में शादी से पहले याचियों के खिलाफ गौतमबुद्धनगर,थाना फेज- दो में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी थी। वहीं एसएचओ जार्जटाउन को भी शादी प्रमाणपत्र जारी करने वाले की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। इसका पालन न करने पर कोर्ट ने उक्त आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। याचिका की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की खंडपीठ ने मधु व एक अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में 21फरवरी 24 को दर्ज एफआईआर को रद्द करने तथा गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई है।
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याची का कहना है कि उन्होंने शादी कर ली है और साथ-साथ रह रहे हैं। परिवार के लोगों ने अपहरण के आरोप में झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। याची ने अपनी आयु साढ़े 17 वर्ष बताई है, किंतु आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि चार मई 2004 है। 24 फरवरी 24 को आर्य समाज मंदिर में शादी की है।
कोर्ट ने मंदिरों, गुरुद्वारों व आर्य समाज प्राइवेट संस्थानों से जारी शादी के प्रमाणपत्रों में समानता पर आश्चर्य प्रकट किया। कहा, स्पष्ट नहीं कि पंजीकरण दस्तावेज किस तरीके से रखे जा रहे हैं। कोर्ट ने प्रथम याची का मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 का बयान दर्ज करने का भी निर्देश दिया है।