जिला अदालत ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 के प्रश्नपत्र लीक मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में धांधली का प्रयास योग्य अभ्यर्थियों के विश्वास को डिगाता है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दिया।
गाजीपुर के जंगीपुर क्षेत्र निवासी आलोक मिश्रा के खिलाफ आयोग के तत्कालीन सचिव ने दो मार्च 2024 को सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि 11 फरवरी 2024 को आयोजित आरओ/एआरओ (प्रारंभिक) परीक्षा-2023 के सामान्य अध्ययन और सामान्य हिंदी प्रश्नपत्रों के प्रश्न एवं उत्तर परीक्षा शुरू होने से पहले सार्वजनिक हो गए थे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि आलोक एफआईआर में नामजद नहीं है। वह एलएलबी अंतिम वर्ष का छात्र है। उसका नाम केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर विवेचना के दौरान सामने आया है। उसके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है।
अदालत ने कहा कि आरोपियों की ओर से संगठित रूप से इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों का दुरुपयोग कर परीक्षा प्रणाली में धांधली का कथित प्रयास किया गया। जिससे पात्र अभ्यर्थियों में कुंठा और हताशा की प्रवृत्ति बढ़ती है। साथ ही शासकीय व्यवस्था से उनका विश्वास डिगने लगता है।