इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दंड आदेश के खिलाफ अपील होगी या प्रत्यावेदन, यह दंड की प्रकृति पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा कर्मचारी नियमावली में इसका उल्लेख है कि दंड की प्रकृति के अनुसार, अपील या शिकायत किस प्राधिकारी को संबोधित की जाए। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने भदोही की शिक्षिका अर्चना साहू के खिलाफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के आदेश को रद्द कर दिया है।
बीएसए ने नाै अप्रैल 2025 को शिक्षिका की एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक दी थी और उन्हें प्राथमिक विद्यालय, भावपुर से स्थानांतरित कर दिया था। याची शिक्षिका ने इस आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था लेकिन कोई सकारात्मक निर्णय न मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने पाया कि शिक्षिका की सेवाएं उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा कर्मचारी नियमावली, 1973 से शासित हैं।
नियमावली के अनुसार कुछ दंड आदेशों के विरुद्ध सक्षम अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अधिकार है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि शिक्षिका के अभ्यावेदन पर एक महीने के भीतर नए सिरे से निर्णय लिया जाए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।