कोर्ट ने कहा- याची ने भरोसा तोड़ा है, राहत पाने का हकदार नहीं
उसके बच्चे हैं। शिकायतकर्ता स्कूल में अध्यापिका है। नाबालिग बेटी के साथ अपने पति से अलग रहती है। याची भी उसी स्कूल में चपरासी है। सहमति से संबंध बनाए गए हैं। दोनों साथ रहते हैं। याची का बेटा शिकायतकर्ता की बेटी भाई-बहन जैसे रहते हैं। सबूत के तौर पर फोटोग्राफ और चैट दिखाए।
याची का कहना था कि उसने शिकायतकर्ता के नाम से जमीन खरीदने का करार भी किया है। वह शादीशुदा है। इसलिए उससे शादी नहीं कर सकता। अभी उसका तलाक भी नहीं हुआ है। याची ने विक्रय करार के पैसे वापस ले लिए तो उसे दुष्कर्म के आरोप में फंसाया गया है। कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी है। साथ ही कुर्की की कार्रवाई शुरू की गई है। इसलिए अग्रिम जमानत दी जाए।
कोर्ट ने कहा कि याची ने पहले भरोसा जीता फिर तोड़ दिया। मां के साथ नाबालिग बेटी से दुष्कर्म किया। वीडियो फुटेज से ब्लैकमेल करने लगा। विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा। वारंट और कुर्की आदेश जारी है। ऐसे में वह अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।