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हाईकोर्ट : मां और नाबालिग बेटी से दुष्कर्म व ब्लैकमेल करने के आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर

Wed, 06 Apr 2022 11:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो वाराणसी ने 30 नवंबर 2021 को याची को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। जिस पर यह अर्जी दाखिल की गई थी। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि उसका परिवार है। वह शादीशुदा है।
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वीडियो फुटेज तैयार कर ब्लैकमेल करने की धमकी देकर नाबालिग बेटी और मां से दुष्कर्म और अवैध संबंध बनाने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आरोप गंभीर है। गैर जमानती वारंट जारी है और कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी फरार है।

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ऐसे में वह अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने याची को दो हफ्ते में अदालत में समर्पण कर जमानत अर्जी दाखिल करने पर कोर्ट को यथाशीघ्र अर्जी तय करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने योगेन्द्र कुमार मिश्र की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।



अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो वाराणसी ने 30 नवंबर 2021 को याची को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। जिस पर यह अर्जी दाखिल की गई थी। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि उसका परिवार है। वह शादीशुदा है।

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कोर्ट ने कहा- याची ने भरोसा तोड़ा है, राहत पाने का हकदार नहीं


उसके बच्चे हैं। शिकायतकर्ता स्कूल में अध्यापिका है। नाबालिग बेटी के साथ अपने पति से अलग रहती है। याची भी उसी स्कूल में चपरासी है। सहमति से संबंध बनाए गए हैं। दोनों साथ रहते हैं। याची का बेटा शिकायतकर्ता की बेटी भाई-बहन जैसे रहते हैं। सबूत के तौर पर फोटोग्राफ  और चैट दिखाए।



याची का कहना था कि उसने शिकायतकर्ता के नाम से जमीन खरीदने का करार भी किया है। वह शादीशुदा है। इसलिए उससे शादी नहीं कर सकता। अभी उसका तलाक भी नहीं हुआ है। याची ने विक्रय करार के पैसे वापस ले लिए तो उसे दुष्कर्म के आरोप में फंसाया गया है। कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी है। साथ ही कुर्की की कार्रवाई शुरू की गई है। इसलिए अग्रिम जमानत दी जाए।



कोर्ट ने कहा कि याची ने पहले भरोसा जीता फिर तोड़ दिया। मां के साथ नाबालिग बेटी से दुष्कर्म किया। वीडियो फुटेज से ब्लैकमेल करने लगा। विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा। वारंट और कुर्की आदेश जारी है। ऐसे में वह अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।
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