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हाईकोर्ट : मथुरा, वृंदावन के मांसाहार होटलों के लाइसेंस निरस्त करने पर सरकार से जवाब तलब

Wed, 02 Mar 2022 08:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याची के अधिवक्ता केके राय ने तर्क दिया कि अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश की अधिसूचना द्वारा मथुरा व वृंदावन को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित कर नगर निगम के 22 वार्डो को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित किया गया।
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा, वृंदावन के मांसाहारी होटलों के लाइसेंस निरस्त कराने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले में सरकार एक सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करे। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति शेखर यादव की खंडपीठ ने मुजाहिद मोहम्मद व नौ अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए नौ मार्च की तिथि निश्चित की है।

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याची के अधिवक्ता केके राय ने तर्क दिया कि अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश की अधिसूचना द्वारा मथुरा व वृंदावन को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित कर नगर निगम के 22 वार्डो को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित किया गया। जिसके अनुपालन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा याचिका कर्ता के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए।



याचिका कर्ता के अनुसार उन्हें न तो कोई नोटिस दी गई और न ही सुनवाई को कोई मौका दिया गया। किसी कानून में इस प्रकार का कोई प्रतिबंध भी नही है और यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 21का उल्लंघन है। कोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।

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