कोर्ट ने कहा कि रशीदुल जाफर/छोटा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य के केस में सर्वोच्च न्यायालय ने समय से पहले रिहाई के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन जमा करने वाले दोषियों की आवश्यकता को हटाने के लिए नीति में संशोधन किया गया है और इसके बजाय पात्र कैदियों पर विचार करने की जिम्मेदारी राज्य के अधिकारियों पर डाल दी गई है।
जेल प्रशासन, जिला और राज्य स्तर पर कानूनी सेवा प्राधिकरण, पुलिस विभाग और राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पात्र कैदियों के मामलों पर नीतिगत मापदंडों के आधार पर विचार किया जा रहा है। लेकिन मौजूदा मामले में अभी तक कोई प्रयास ही नहीं शुरू किया गया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इलाहाबाद से अपीलकर्ता की स्थिति के बारे में रिपोर्ट मांगी गई तो बताया गया कि याची अपीलकर्ता पांच अप्रैल 2003 से सेंट्रल जेल नैनी प्रयागराज में बंद है। कोर्ट ने तथ्यों को देखने के बाद कहा कि लंबी हिरासत और कोई आपराधिक इतिहास न होने के बावजूद वरिष्ठ अधीक्षक सेंट्रल जेल नैनी द्वारा समय से पहले रिहाई के लिए अपीलकर्ता का मामला क्यों शुरू नहीं किया गया।
कोर्ट ने ऐसी स्थिति को देखते हुए अपीलकर्ता को पचास हजार के निजी मुचलके और दो प्रतिभूतियां पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं। अधिवक्ता दीपांशु कुशवाहा ने बताया कि अपील पर 15 दिसंबर को सुनवाई होगी।