सुनवाई का अवसर दिए बिना टिप्पणी करना अनुचित
हाईकोर्ट ने बृज किशोर ठाकुर बनाम भारत संघ और के न्यायिक अधिकारी मामलों का हवाला देते हुए कहा कि उच्च न्यायालयों का उद्देश्य निचली अदालतों की त्रुटियों को सुधारना है, न कि उन पर कठोर टिप्पणी करना। साथ ही अवनी कुमार उपाध्याय बनाम इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध उसके आचरण पर टिप्पणी करने से पूर्व उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है। न्यायालय ने पाया कि इस मामले में ऐसा अवसर नहीं दिया गया था, इसलिए याचिका स्वीकार कर ली गई और अपमानजनक टिप्पणियों को निरस्त कर दिया गया।