इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डकैती के 39 साल पुराने मामले में भगवान दास, रमेश चंद्र और प्रेम चंद्र चौरसिया की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि तीनों आरोपियों की डकैती में सक्रिय भूमिका थी या उनका कोई साझा आपराधिक इरादा था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डकैती के 39 साल पुराने मामले में भगवान दास, रमेश चंद्र और प्रेम चंद्र चौरसिया की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि तीनों आरोपियों की डकैती में सक्रिय भूमिका थी या उनका कोई साझा आपराधिक इरादा था। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने दिया है।
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मामला वर्ष 1984 का महोबा, हमीरपुर का है। आरोप था कि नारे लगाती भीड़ ने साइकिल और रेडियो की दुकानों में लूटपाट की। पुलिस के रोकने पर भीड़ ने पथराव किया। बाद में लाठीचार्ज के दौरान पांच आरोपियों को लूटे गए सामान के साथ गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 1987 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को डकैती मामले में दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसे फैसले को अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि कई सामान घटना के कई दिन बाद आरोपियों के घर से बरामद किए गए, जबकि पुलिस ने मौके से गिरफ्तारी का दावा किया था। इससे अभियोजन की कहानी संदिग्ध हुई। कोर्ट ने कहा कि केवल भीड़ का हिस्सा होना सक्रिय अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। इसी आधार पर तीनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।