औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था।
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हेडकांस्टेबल से दरोगा के पद पर प्रोन्नति के लिए जारी 2193 लोगों की सूची को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया है कि प्रोन्नति देने में मनमाना तरीका अपनाया गया है। कई पात्र उम्मीदवारों को वरिष्ठता सूची में नाम होने के बावजूद प्रोन्नति सूची में स्थान नहीं दिया गया जबकि वह प्रोन्नति के लिए आयोजित टेस्ट में सफल घोषित हुए थे। उनके बजाए सूची में कनिष्ठ लोगों को प्रोन्नति दी गई है।
भगवान स्वरूप शर्मा और अन्य याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचिका पर छह सप्ताह के बाद सुनवाई होगी। याचीगण के अधिवक्ता विजय गौतम ने बताया कि 3822 हेडकांस्टेबलों को दरोगा के पद पर प्रोन्नत करने के लिए वरिष्ठता सूची जारी की गई।
प्रोन्नति देने से पूर्व टेस्ट आयोजित किया गया जिसमें 3.2 किलोमीटर की रेस 35 मिनट में पूरी करनी थी। कुल 2900 लोगों को टेस्ट में पास किया गया मगर प्रोन्नति सूची 2193 की जारी की गई। प्रोन्नति देने में वरिष्ठता का भी ध्यान नहीं रखा गया। विभाग ने यह भी नहीं बताया कि किन कारणों से याचीगण को प्रोन्नति के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। याचीगण ने नियमानुसार तीन वर्ष से अधिक संतोषजनक सेवा की है। कोर्ट ने पूछा है कि दरोगा प्रोन्नति वरिष्ठता और योग्यता को नजरअंदाज करने का क्या कारण है।