हाईकोर्ट ने कहा है कि केंद्र या राज्य की सरकार को जनहित में धर्मस्थलों सहित किसी भी भूमि के अधिग्रहण का अधिकार है। इस मामले में धार्मिक स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम केंद्र या राज्य सरकार पर लागू नहीं होगा। यह अधिनियम सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए धार्मिक संगठनों पर लागू होगा, ताकि धर्मस्थलों की भूमि का दुरुपयोग न किया जा सके।
जहां तक राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण का सवाल है सरकार पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हाईकोर्ट ने आगरा-इटावा बाईपास बनाने के लिए मूर मेमोरियल चर्च शिकोहाबाद की जमीन के अधिग्रहण को सही करार देते हुए इसके खिलाफ दाखिल याचिका खारिज कर दी है। चर्च ऑफ नार्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन आगरा की याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की। अधिग्रहण 2012 में किया गया था, जिसे 2016 में चुनौती दी गई। कोर्ट ने अधिग्रहण को चुनौती देने में अनावश्यक विलंब के आधार पर याचिका खारिज कर दी।
केंद्र सरकार ने 17 अगस्त 2012 को फोरलेन बाईपास को सिक्स लेन बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। फिरोजाबाद सुभाष तिराहे पर चर्च की भूमि का भी अधिग्रहण कर लिया गया। इसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि धार्मिक स्थल की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। आधार लिया गया कि धार्मिक स्थल की भूमि की प्रकृति नहीं बदली जा सकती है। यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 30 का उल्लंघन होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की दलील थी कि केंद्र सरकार को धर्मस्थल सहित किसी भी भूमि के अधिग्रहण का अधिकार है। कोर्ट ने दलील स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि अथॉरिटी चर्च को दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर विचार करे।