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Prayagraj : युद्ध की तपिश से बिगड़ा रसोई का बजट, सरसों तेल के बाद अब दालों के भी दाम बढ़े

Thu, 02 Apr 2026 01:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ईरान और इस्राइल युद्ध ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। वैश्विक तनाव का असर प्रयागराज के तेल बाजार पर पड़ा है। महज 25 दिन के भीतर रिफाइंड और सरसों तेल की कीमतों में 10 से 20 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।
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दुकान पर सजी दाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ईरान और इस्राइल युद्ध ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। वैश्विक तनाव का असर प्रयागराज के तेल बाजार पर पड़ा है। महज 25 दिन के भीतर रिफाइंड और सरसों तेल की कीमतों में 10 से 20 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इस बीच अरहर समेत अन्य दालों के दाम बढ़ने से आम आदमी की थाली पर असर साफ दिखने लगा है।

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व्यापारियों ने बताया कि बाजार में सीमित माल है, इसलिए दाम बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। बाजार में सरसों का तेल कुछ दिन पहले तक 145-150 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, जो अब 170-175 रुपये तक पहुंच गया है। रिफाइंड का भी दाम 150 से बढ़कर 160 रुपये हो गया है। वहीं, अरहर की दाल का दाम 110 से बढ़कर 120 रुपये प्रति किलो हो गया है। फुटकर में कुछ दुकानदार अरहर दाल 130 रुपये प्रति किलो में भी बेच रहे हैं।

फुटकर कारोबारी प्रमिल केसरवानी ने बताया कि अगर युद्ध नहीं रुका तो खाद्य तेलों के दाम में इजाफा जारी रहेगा। थोक बाजार में 15 दिन पहले 15 लीटर सरसों के तेल का दाम 2400 था, जो अब बढ़कर 2600 रुपये पहुंच गया है। इसी तरह 15 लीटर रिफाइंड का दाम 2300 से बढ़कर 2400 रुपये हो गया है। कारोबारी दीपक केसरवानी ने बताया कि वनस्पति घी और पामोलीन ऑयल के भी दाम में वृद्धि हुई है।

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44 से 48 रुपये प्रति किलो में बिक रहा गेहूं का आटा

बीते कुछ दिनों के भीतर दलहन बाजार में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। थोक से लेकर फुटकर बाजार तक दालों की कीमतें आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। उड़द दाल ने 130 रुपये प्रति किलो का आंकड़ा छू लिया है। वहीं, मूंग दाल भी अब 110 से 120 रुपये प्रति किलो में बिक रही है। फुटकर में गेहूं का आटा भी अब 44 से 48 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। थोक कारोबारी सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि सरसों के तेल का दाम अभी और बढ़ने की उम्मीद है।

इस वजह से बढ़ रहे खाद्य तेलों के दाम

वरिष्ठ कर एवं वित्त सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल का कहना है कि ईरान और इस्राइल संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स (परिवहन) लागत में वृद्धि की आशंका है। इसी डर से स्टॉकहोल्डर्स सक्रिय हो गए हैं और बाजार में कृत्रिम कमी के साथ कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। जहाजों का रूट बदलने से खर्च बढ़ा है। रिफाइंड के लिए सोया क्रूड ब्राजील व अर्जेंटीना से और पाम ऑयल मलयेशिया व इंडोनेशिया से आता है, ये सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई हैं।
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