अपील दाखिल होने के लगभग तीन साल बाद हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित करते हुए आरोपी की जमानत मंजूर कर ली थी। सरकार की तरफ से दाखिल जमानत निरस्त करने की अर्जी में कहा गया है कि परवेज परवाज के खिलाफ 14 आपराधिक केस दर्ज है।
गोरखपुर के कथित समाजसेवी परवेज परवाज की सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई से न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने स्वयं को अलग करते हुए उचित पीठ के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने दिया है। इसलिए मामले की सुनवाई टल गई।
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इससे पहले हाईकोर्ट ने गोरखपुर की अदालत द्वारा परवेज परवाज को दी गई सजा को निलंबित कर जमानत पर रिहाई का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस अंतरिम आदेश को विखंडित करने की अर्जी दाखिल की है। मामले में गोरखपुर की अदालत ने परवेज परवाज को एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म केस में दोषी मानते हुए दस साल की कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है, जिसे अपील में चुनौती दी गई है।
अपील दाखिल होने के लगभग तीन साल बाद हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित करते हुए आरोपी की जमानत मंजूर कर ली थी। सरकार की तरफ से दाखिल जमानत निरस्त करने की अर्जी में कहा गया है कि परवेज परवाज के खिलाफ 14 आपराधिक केस दर्ज है। जबकि, उनकी तरफ से कहा गया कि केवल एक केस है, जिसमें भी हाईकोर्ट से राहत मिली है। आरोपी की तरफ से गलत तथ्य बताकर राहत ली गई है। इसलिए जमानत निरस्त की जाए।