इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश-2025 की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश-2025 की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। स्थायी अधिवक्ता ने निवेदन किया कि इससे संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट चल रहा है। इसलिए सुनवाई स्थगित की जाए। इस पर कोर्ट ने छह अगस्त की तिथि नियत कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने प्रणव गोस्वामी और अन्य की याचिका पर दिया है।
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याची ने बांके बिहारी मंदिर अध्यादेश को याचिका में चुनौती दी है। यह अध्यादेश मंदिर के लिए सरकार-नियंत्रित ट्रस्ट बनाने का प्रावधान करता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) संजय गोस्वामी ने दलील दी कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी संस्थान है, जिसका प्रबंधन स्वामी हरिदास जी के वंशज करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश पिछले दरवाजे से मंदिर पर नियंत्रण करने का प्रयास है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी की ओर से उठाए गए सवाल का जवाब देने का निर्देश दिया है। बुधवार को राज्य की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया और सुनवाई स्थगित करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने छह अगस्त की तिथि नियत कर दी।